_विद्या मन्दिर रामबाग में प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक_
बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में आज शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक का दूसरा दिन वन्दना के साथ प्रारम्भ हो गया। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय शिक्षा सेवा प्रमुख मा. योगेश जी के साथ शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक मा. रामसिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रथम सत्र (वैचारिक सत्र) का प्रारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन व वन्दना से हुआ। मंच पर उपस्थित अतिथियों का परिचय एवं स्वागत सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग के प्रधानाचार्य श्री गोविन्द सिंह द्वारा कराया गया।
प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह जी ने प्रधानाचार्य बैठक में कल पूर्ण किये गये कार्यों की समीक्षा की और शेष कार्य पूर्ण करने को कहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय और छात्रों का सम्यक विकास करना ही आप सब का उद्देश्य होना चाहिए। आचार्य और बच्चों के मनोभाव को ध्यान में रखते हुए हमारा व्यवहार होना चाहिए। प्रधानाचार्य और आचार्य को बच्चों के अभिभावक के रूप में कार्य करना चाहिए। परिसर की स्वच्छता और शुचिता बनाए रखने के लिए प्रति सप्ताह अभ्यास होना चाहिए। छोटे बच्चों के प्रति स्नेह भाव होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय सामाजिक चेतना का केंद्र होते हैं। अतः विद्यालयों को सामाजिक सरोकारों की ओर भी ध्यान देना चाहिये। यह भी हमारा सामाजिक कर्तव्य है। आचार्य और अभिभावक के साथ मधुर भाषा में बात करना चाहिए। संकुल के सभी विद्यालयों का समुचित विकास होना चाहिए। आधारभूत विषयों का सम्यक अध्यापन होना चाहिए। संकुल केन्द्र विद्यालय अपने संकुल के अन्य विद्यालयों के संसाधनों का विकास कर सकते हैं। खेल के उपकरण, कंप्यूटर आदि की व्यवस्था की जा सकती है। प्रभावी अभिभावक सम्पर्क होना चाहिए, जिस दिन उस घर के, परिवार के सभी सदस्य उपस्थित हों। इससे पारिवारिक भाव प्रकट होता है और परिवार की कमियां प्रकट हो जाती है जिसे हम सुधार सकते हैं। छात्र का घर के सदस्यों के प्रति व्यवहार, छात्र के मित्रों की सम्यक जानकारी, घर की स्वच्छता, घर में तुलसी का पौधा, स्वस्तिक चिह्न हों, सभी सदस्य एक साथ भोजन करें आदि की चर्चा हम उस परिवार से कर सकते हैं। इससे बालक का सर्वांगीण विकास संभव है।
प्रांतीय सेवा शिक्षा प्रमुख मा. योगेश जी ने भी बैठक को संबोधित किया। अनौपचारिक शिक्षा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें समाज के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। स्वयं का मूल्यांकन करते हुए स्वयं को, पूर्व छात्रों तथा अभिभावकों को भी समाज से जोड़ना हमारा प्रमुख कर्तव्य है। स्वस्थ समाज निर्माण के लिए यह परम आवश्यक है।
बैठक में प्रांत के सभी विद्यालयों से आए हुए प्रधानाचार्य – प्रधानाचार्या, छात्रावास प्रमुख, शिशु वाटिका प्रमुख आचार्य और आचार्या बहनें भाग ले रहे हैं।

