मऊ में भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 के समापन पर दिखा उत्साह, 37 हजार विद्यार्थियों ने भाषा और संस्कृति से जोड़ा संवाद

मऊ: भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 का जनपद मऊ में उत्साहपूर्ण माहौल के बीच समापन हो गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय एवं राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देश पर 13 मई से 19 मई तक चले इस विशेष शिविर में…

मऊ: भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 का जनपद मऊ में उत्साहपूर्ण माहौल के बीच समापन हो गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय एवं राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देश पर 13 मई से 19 मई तक चले इस विशेष शिविर में जिले के हजारों छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे सप्ताह विद्यालयों में भाषा, साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों की जीवंत झलक देखने को मिली।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार उपाध्याय एवं सभी खंड शिक्षा अधिकारियों के निर्देशन में परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रतिदिन दो घंटे अतिरिक्त समय देकर शिविर का संचालन किया गया। शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं से जुड़ी गतिविधियों में प्रतिभाग किया। बच्चों ने कविता पाठ, कहानी लेखन, भाषण, लोकगीत, संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, चित्रकला तथा समूह गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यालयों में बच्चों का उत्साह और सहभागिता पूरे आयोजन के दौरान आकर्षण का केंद्र बनी रही।

जनपद स्तर पर आयोजित इस अभियान में लगभग 37 हजार विद्यार्थियों, 2900 शिक्षकों तथा 1250 स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं कार्यक्रम की गतिविधियों को सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी व्यापक पहचान मिली। जनपद मऊ में आयोजित शिविर की गतिविधियों को महानिदेशालय स्तर पर सराहना मिलने से शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखा गया।

शिविर को सफल बनाने में एसआरजी संजय कुमार तिवारी, अरविंद पांडेय, राकेश कन्नौजिया, सभी एआरपी, शिक्षक संकुल सदस्यों तथा जिला समन्वयक प्रशिक्षण दुर्गा प्रसाद यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समापन अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि भारतीय भाषा शिविर जैसे आयोजन बच्चों को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। इससे विद्यार्थियों में भाषाई ज्ञान के साथ-साथ आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता का भी विकास होता है।

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