शराबी और मांसाहारी व्यक्ति का सामाजिक वहिष्कार करे युवा पीढ़ी-पंकज

बस्ती 7 मई। सनातन धर्म संस्था द्वारा श्री दुर्गा मंदिर दुबौली दूबे में आयोजित चरित्र निर्माण शिविर में 7 वें दिन बालक बालिकाओं को आत्मरक्षा एवं सैन्य प्रशिक्षण का अभ्यास कराया गया। इस शिविर में प्रशिक्षक विनय पँवार, आयुष यादव, मान्यता, शीतल राव, मानवी, अनुज मिश्र, प्रथा, संस्कृति त्रिपाठी और अंकिता के सानिध्य में बालकों और बालिकाओं को आत्मरक्षा,…

बस्ती 7 मई। सनातन धर्म संस्था द्वारा श्री दुर्गा मंदिर दुबौली दूबे में आयोजित चरित्र निर्माण शिविर में 7 वें दिन बालक बालिकाओं को आत्मरक्षा एवं सैन्य प्रशिक्षण का अभ्यास कराया गया। इस शिविर में प्रशिक्षक विनय पँवार, आयुष यादव, मान्यता, शीतल राव, मानवी, अनुज मिश्र, प्रथा, संस्कृति त्रिपाठी और अंकिता के सानिध्य में बालकों और बालिकाओं को आत्मरक्षा, राष्ट्र रक्षा और स्वास्थ्य रक्षा के गुण सिखाए जा रहे हैं।
कर्नल के सी मिश्र ने बौद्धिक के सत्र मे बच्चों को बस्ती शहर के महापुरुषों, प्रमुख मार्गों, प्रमुख स्थलों के विषय में बताया, उन्होंने दैनिक जीवन मे योग, प्राणायाम की आवश्यकता के विषय में विस्तार से बताया और बच्चों से योगाभ्यास भी कराया गया। उन्होंने आयोजन के विषय मे कहा कि सनातन धर्म संस्था समाज को एक सुयोग्य युवा शक्ति सौंपकर देश को शक्तिशाली बनाना चाहती है। उन्होंने बताया कि शिविर में सभी बालक बालिकाओं के लिए समान अवसर प्रदान कर उन्हे सीखने का मौका दिया जाता है।
इस अवसर पर बौद्धिक की कक्षा लेते हुए सनातन धर्म संस्था के सदस्य पंकज त्रिपाठी ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान, कर्म और भक्ति योग के द्वारा बच्चों को पुरुषार्थी, प्रतापी और संवेदनशील बनाना संस्था का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बच्चों को शाकाहारी व मांसाहारी के अंतर बताये और बताया कि आधुनिक विज्ञान द्वारा मनुष्यो के साथ धोखा करके मनुष्य को सर्वाहारी पढ़ा कर जीव हत्या को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण ने गीता के 16वें अध्याय में सात्त्विक, राजसिक व तामसिक भोजन की, भोजन से रक्त और रक्त से मन, बुद्धि तक की पूरी यात्रा बताई है। उन्होंने कहा कि आज बीमार लोगों में जो सर्वाधिक संख्या है वो मांसाहारी लोगों की है। आज का युवा शराब, तम्बाकू, सिगरेट आदि नशे और मांसाहार में लिप्त होकर अपनी बुद्धि को पशुवत बना रहा है, और अपना मानव जीवन नष्ट कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे वेद व शास्त्र हमें कहते हैं कि क्या भक्ष है और क्या अभक्ष है इसका विचार करके ही हमें कुछ खाना चाहिये। उन्होंने बच्चों से कहा कि कर्म करने का भौतिक माध्यम शरीर है, इसलिए इसे सुरक्षित और सुंदर रखना हमारा दायित्व है, धर्म है। उन्होंने कहा कि जीभ के स्वाद या स्वयं के लाभ के लिये जीव हत्या नही करना चाहिए। उन्होंने बच्चों से अंडा, माँस, शराब, नशा आदि न करने का संकल्प दिलाया।
अभिभावक भी अपने बच्चों में सकारात्मक बदलाव देखकर संस्था के प्रति आभार प्रकट कर रहे हैं।

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